दुर्गा सप्तशती का पाठ सिद्ध करने की विधि और उत्तम उपाय

जय माता दी ! प्रिय पाठकों, कैसे हैं आप लोग, हमें उम्मीद है आप अच्छे होंगे। आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे दुर्गा सप्तशती का पाठ सिद्ध करने की विधि और उत्तम उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी। 

दुर्गा सप्तशती का पाठ सिद्ध करने की विधि और उत्तम उपाय

दुर्गा सप्तशती का पाठ सिद्ध करने की विधि और उत्तम उपाय
 दुर्गा सप्तशती का पाठ सिद्ध करने की विधि और उत्तम उपाय


दुर्गा सप्तशती एक अत्यंत प्रभावशाली ग्रंथ है, जिसमें माँ दुर्गा के महात्म्य का वर्णन है। इसे चंडी पाठ भी कहा जाता है और इसका पाठ करने से अद्भुत सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती हैं। लेकिन इसकी सिद्धि के लिए सही विधि, नियम और आस्था का पालन करना बहुत आवश्यक है।

दुर्गा सप्तशती सिद्ध करने की विधि

अगर आप दुर्गा सप्तशती को सिद्ध करना चाहते हैं, तो इसके लिए निम्नलिखित विधि अपनाएँ।

1. स्थान और शुद्धता का ध्यान रखें

पवित्र स्थान- पाठ करने के लिए एक शुद्ध, शांत और स्वच्छ स्थान चुनें।

स्नान और वस्त्र- पाठ से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

आसन- कुशा, लाल वस्त्र या ऊन का आसन प्रयोग करें।

दीपक और धूप- घी का दीपक जलाकर, माँ दुर्गा के सामने धूप या अगरबत्ती लगाएँ।

2. दुर्गा सप्तशती पाठ की उपयुक्त विधि

सप्तशती का पाठ नवरात्रि में करना सबसे अधिक फलदायी होता है।

संख्या का निर्धारण

यदि कोई विशेष इच्छा हो, तो 9, 21 या 108 बार सप्तशती का संपूर्ण पाठ करें।

यदि सिद्धि प्राप्त करनी हो, तो नवरात्रि में 9 दिन तक प्रतिदिन 5 या 7 बार पाठ करें।

संकल्प लें- पाठ शुरू करने से पहले संकल्प करें कि आप इसे विधिवत और श्रद्धा से पूर्ण करेंगे।

3. पाठ का क्रम

दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। इसे तीन भागों में बाँटा गया है

1. प्रथम चरित्र- महाकाली का प्राकट्य और मधु-कैटभ वध

2. मध्य चरित्र- महालक्ष्मी का प्राकट्य और महिषासुर वध

3. उत्तर चरित्र- महासरस्वती का प्राकट्य और शुंभ-निशुंभ वध

संपूर्ण पाठ विधि

1. अर्गला स्तोत्र

2. कीलक स्तोत्र

3. कवच पाठ

4. पूरी सप्तशती (13 अध्याय)

5. रहस्यत्रयी (प्रदानिक, वैष्णवी और मूर्ति रहस्य)

6. कवच, अर्गला और कीलक का पुनः पाठ

7. देव्यापराध क्षमापन स्तोत्र

8. अंत में दुर्गा सप्तशती की आरती

4. जाप और अनुष्ठान

पाठ के साथ-साथ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 108 बार जप करें।

नवरात्रि में यदि संभव हो तो घी का अखंड दीप जलाएँ।

अंत में माँ दुर्गा को मीठा भोग अर्पित करें और सबको प्रसाद वितरित करें।

5. दुर्गा सप्तशती की सिद्धि के संकेत

यदि आप पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ सप्तशती का पाठ कर रहे हैं, तो कुछ संकेत मिल सकते हैं:

माँ दुर्गा के दिव्य स्वप्न दर्शन होने लगेंगे।

मन अत्यधिक शांत और शक्तिशाली महसूस करेगा।

बाधाएँ स्वतः दूर होने लगेंगी।

साधना के दौरान गंध, प्रकाश, ऊर्जा या अन्य दिव्य अनुभव होने लगेंगे।

दुर्गा सप्तशती के पाठ से सिद्धि प्राप्त करने के अन्य विशेष उपाय

1. शुक्रवार या अष्टमी से प्रारंभ करें।

2. गुप्त नवरात्रि में सप्तशती का पाठ विशेष प्रभावी होता है।

3. कमल, लाल फूल या दूर्वा से माँ की पूजा करें।

4. एक ही स्थान पर बैठकर पाठ करें, जगह न बदलें।

5. सप्तशती पाठ के बाद अपराध क्षमापन स्तोत्र जरूर पढ़ें।

विशेष सावधानियाँ

कभी भी दुर्गा सप्तशती का पाठ मजाक, अधूरे मन या शुद्धता के बिना न करें।

पाठ करते समय मांसाहार और तामसिक भोजन से बचें।

सप्तशती का पाठ कभी भी किसी को हानि पहुँचाने के लिए न करें।

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संक्षेप 

यदि आप संपूर्ण नियम, विधि और भक्ति के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे, तो न केवल आपकी मनोकामना पूर्ण होगी बल्कि आप माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। सात्विक जीवनशैली और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ शीघ्र सिद्धि दिलाता है।

दुर्गा सप्तशती से जुड़ी महत्वपूर्ण FAQs और उनके उत्तर

1. दुर्गा सप्तशती को सिद्ध करने के लिए क्या करना चाहिए?

दुर्गा सप्तशती को सिद्ध करने के लिए नवरात्रि या गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों तक नियमित पाठ करें। प्रतिदिन स्नान के बाद लाल आसन पर बैठकर पाठ करें और ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 108 बार जाप करें। अखंड दीप जलाएँ और मन, वचन, और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।

2. दुर्गा सप्तशती के कौन से सिद्ध चमत्कारी मंत्र हैं?

कुछ सिद्ध चमत्कारी मंत्र इस प्रकार हैं

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (सर्वसिद्धि और सुरक्षा के लिए)

रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि (सौंदर्य, विजय और यश प्राप्ति के लिए)

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमः (शक्ति जागरण के लिए)

3. दुर्गा सप्तशती पुस्तक कैसे पढ़ी जाती है?

दुर्गा सप्तशती को विधि अनुसार इस क्रम में पढ़ना चाहिए

1. शाप विमोचन

2. मधु-कैटभ वध (प्रथम अध्याय)

3. महिषासुर वध (मध्य भाग)

4. शुंभ-निशुंभ वध (उत्तर भाग)

5. कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक

6. देव्यापराध क्षमापन स्तोत्र और आरती

मोबाइल में पीडीएफ से देवी भागवत मन में पढ़ने से लाभ मिलता है?

4. दुर्गा सप्तशती का उत्कीलन कैसे करें?

दुर्गा सप्तशती के उत्कीलन का अर्थ है इसके छुपे हुए प्रभावों को जाग्रत करना। यह गुरु के मार्गदर्शन में विशेष अनुष्ठान द्वारा किया जाता है। नियमित पाठ और संकल्प से धीरे-धीरे इसका उत्कीलन स्वाभाविक रूप से हो सकता है।

5. दुर्गा सिद्धि मंत्र क्या है?

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे यह माँ दुर्गा का सिद्ध मंत्र है, जो सभी कार्य सिद्ध करने की शक्ति देता है।

6. दुर्गा सप्तशती पाठ एक दिन में कितना करना चाहिए?

इच्छा के अनुसार पाठ की मात्रा

  • सामान्य व्यक्ति- 1 अध्याय या संपूर्ण सप्तशती का 1 पाठ
  • विशेष कार्यसिद्धि के लिए- 5 बार
  • नवरात्रि अनुष्ठान में- 9 दिनों में 9 बार या प्रतिदिन 1 बार

7. दुर्गा सप्तशती को शाप मुक्त कैसे करें?

शाप विमोचन के लिए पहले शाप विमोचन स्तोत्र पढ़ें। फिर कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ करें। इसके बिना पाठ करने से इसका संपूर्ण प्रभाव नहीं मिलता।

8. क्या हम रात में दुर्गा सप्तशती पढ़ सकते हैं?

हाँ, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) और संध्या काल में इसका प्रभाव सबसे अधिक होता है। रात में पढ़ते समय मन को शुद्ध रखें और अनावश्यक बातचीत से बचें।

9. क्या मैं दुर्गा कवच रोज पढ़ सकता हूँ?

हाँ, दुर्गा कवच को रोज पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है। यह रक्षा कवच की तरह कार्य करता है और नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाता है।

10. दुर्गा के 32 नाम जपने से क्या लाभ है?

माँ दुर्गा के 32 नामों का जप करने से जीवन में विजय, सुख-समृद्धि और सुरक्षा प्राप्त होती है। यह विपत्तियों से रक्षा करता है और मनोवांछित फल देता है।

11. क्या हम बिना गुरु के दुर्गा सप्तशती पढ़ सकते हैं?

हाँ, लेकिन सही विधि का पालन करें। यदि गुरु न हों, तो पुस्तक में दी गई विधि के अनुसार पाठ करें और श्रद्धा व नियमों का पालन करें।

12. दुर्गा सप्तशती को श्राप क्यों दिया जाता है?

मान्यता है कि सप्तशती के शक्तिशाली मंत्रों का दुरुपयोग न हो, इसलिए इसे कीलक द्वारा शापित किया गया है। इसे प्रभावी बनाने के लिए कीलक स्तोत्र पढ़ा जाता है।

13. दुर्गा सप्तशती में पहले क्या पढ़ना चाहिए?

शुरुआत में शाप विमोचन, कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक पढ़ना अनिवार्य होता है। इसके बाद सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

14. अर्गला स्तोत्र पढ़ने से क्या होता है?

अर्गला स्तोत्र पढ़ने से जीवन में विजय, धन-वैभव, सौंदर्य और समृद्धि आती है। यह विशेष रूप से माँ दुर्गा के भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी होता है।

15. माता दुर्गा के पुत्र का नाम क्या है?

माता दुर्गा के पुत्र का नाम स्कंद (कार्तिकेय) है। वे युद्ध के देवता हैं।

16. क्या पार्वती ही दुर्गा है?

हाँ, माँ दुर्गा, माँ पार्वती का ही उग्र रूप हैं। जब राक्षसों का संहार करना आवश्यक होता है, तब वे दुर्गा रूप धारण करती हैं।

17. रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि का हिंदी में क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है-

माँ! मुझे सुंदर रूप, विजय, यश और शत्रुओं से मुक्ति प्रदान करें।"

18. नौ देवियों में सबसे बड़ी देवी कौन सी है?

नौ देवियाँ माँ दुर्गा के विभिन्न रूप हैं, जिनमें माँ सिद्धिदात्री अंतिम और सबसे शक्तिशाली मानी जाती हैं।

19. आद्या शक्ति कौन हैं?

आद्या शक्ति का अर्थ है प्रथम शक्ति। माँ दुर्गा को ही आद्या शक्ति कहा जाता है, क्योंकि वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा हैं।

प्रिय पाठकों, क्या आपको यह पोस्ट पसंद आई? आशा करते हैं कि आपको पोस्ट पसंद आई होगी। अपनी राय हमें कमेंट में बताएं! ऐसी ही रोचक जानकारियों के साथ विश्वज्ञान मे फिर से मुलाकात होगी। तब तक के लिए आप हंसते रहें, खुश रहें और औरों को भी खुशियाँ बांटते रहें। 

धन्यवाद 

हर हर महादेव 

जय माँ दुर्गा

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